कोन कहता है कि सपने पूरे नहीं होते। बस उस सपने को पूरा करने की ज़िद्द होनी चाहिए।बेस्ट मोटीवेशन स्टोरी

 नमस्ते दोस्तो आज फिर से एक नई मोटीवेशन से भरपूर स्टोरी में आपका स्वागत है। आप हेड लाइन देख कर समझ ही गए होंगे कि हम किस टॉपिक के ऊपर बात करने वाले है सपने पूरे होते है। आज में आपको से इंसानों के बारे में बताने जा रहा हूं जिन्होने अपनी जिंदगी में कितनी मुश्किलों का सामना करके अपने सपने पूरे किए। तो आइए शुरू करते है। 




1 अरुणिमा सिन्हा (भारत)~~ 12 अप्रेल 2011 रात को कुछ।  गुंुण्डो ने  चलती ट्रेन से एक लड़की को बाहर फेक दिया जब उसे होश आया तो उसका पैर टूट चुका था।वो लड़की पूरी रात उस पटरी पर पड़ी रही। सुबह कुछ लोगो ने उसे अस्पताल पहुंचाया। फिर उसने यह महसूस किया कि उन लोगो का उसके प्रति नजरिया बदल गया था । सब लोग उसे अपाहिज समझ कर सिंपती को नज़र से देख  रहे थे जो की उसे बिलकुल पसंद नहीं था।  और उसने उसी वक्त खुद से तय कर लिया कि अब मुझे कुछ ऐसा करना है । जो इस लोगो की आखों में जो सिंपती है उसकी जगह मुझे रेस्पेक्ट  हो । उसने इस बात को अपना सपना बना लिया। अब में वो करूंगी जो लोग दोनों पैर होने के बावजूद भी नहीं कर सकते। इस लड़की ने  माउंट एवरेस्ट चढ़ने का निश्चय किया। और इसने अपनी ट्रेनिंग भी शुरू कर दी थी । जैसा कि हम जानते है सोचने और करने में बड़ा फर्क होता है। जब इस लड़की ने अपनी ट्रेनिग स्टार्ट की तब इसके घाव भरे नहीं थे और कुछ दूर चलने पर ही उसके घावों से खून निकलने लगता था।इसके पास अवसर था । इसके पास अवसर था चोट का बहाना दे कर पीछे हट सकती थी । लेकिन ये लड़की पीछे हटने को तैयार ही नहीं थी । इसने हर तरह का दर्द सह कर अपनी ट्रेनिंग पूरी की  ओर अब ये तेयार थी माउंट एवरेस्ट चढ़ने के लिए।  और जब चड़ाई के दिन ही इस लड़की की नकली टांग देख कार शिरपा ने उसे ऊपर ले जाने से मना कर दिया लेकिन इस लड़की की ज़िद्द और हिम्मत के आगे शीरपा को भी मानना पड़ा। ओर फिर शुरू होती है एवरेस्ट कि चड़ाई ओर जब ये लड़की चोटी पर पहुंचने ही वाली थी कि इसकी ऑक्सिजन खत्म होने लगती है। फिर भी ये लड़की पीछे नहीं हटती है और शिर्पा से कहती है कि अब में इतनी दूर आयी हो हूं तो अब में वापिस यह से ज़िंदा जाऊ या मुर्दा लेकिन इस चड़ाई को पूरा किए बगैर तो नहीं जाऊंगी । ओर कुछ देर बाद ये लड़की एवरेस्ट कि चोटी पर खड़ी थी जो सपना इसने हॉस्पिटल के बेड पर लेटे हुए देखा आज वो इसने पूरा किया। ये लड़की ओर कोई नहीं अरुणिमा सिन्हा है । जो 2013 में  माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली दुनिया की पहली एंप्टी है ।  इन्होंने हर उस इंसान को साबित कर दिया कि की अपाहिज वो नहीं जिसके पास हाथ या पैर नहीं बल्कि अपाहिज वो है लोग है जो ये सोचते है की हम नहीं कर सकते ।




करलोई (हंगरी)~~ हंगरी में कारलोई नाम का के लड़का रहता था जो हंगरी का बेस्ट शूटर था। ओर उसने नेशनल और इंटरनेशनल कई मेडल जीते थे । उसका एक सपना था कि वो अपने देश के लिए ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाए । सबकुछ अच्छा चल रहा था लेकिन उसकी मिल्ट्री ट्रेनिंग में उसके हाथ में ही एक ग्रेनेट फुट गया। जिससे उसका राइट हेंड जिससे वो शूटिंग करता था उसकी बॉडी से अलग हो गया था। ओर उसके पास बचा था उसका लिफ्ट हेड। कई मुसीबतों के बावजूद तीन महीने के अंदर ही इस बंदे ने लेफ्ट हैंड कि शूटिंग ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। दिन रात उसने मेहनत कि ओर एक साल बाद वो नेशनल  में भाग लेने आ गया था। वहां सब लोगो को लगा कि वो प्लयेर को मोटिवेट करने आया करने आया है । लेकिन लोगो को हैरानी तो तब हुई जब उसने हिस्सा लेकर  जीत कर दिखाया । अब इसका मकसद था कि ओलम्पिक में गोल्ड मेडल जितना । लेकिन बदकिस्मती से 1940 के ओलम्पिक विश्व युद्ध के कारण रद्द हो गए थे । लेकिन ये बंदा बिना हार मैने 1944 के ओलम्पिक की तैयारी में जुट गया। लेकिन 1944 के ओलम्पिक भी विश्व युद्ध की वजह से रद्द हो गए । अब इसका बंदे का शरीर तो हार मान चुका का लेकिन इसकी ज़िद्द कायम थी । ओर आखिर कर वो दिन आ गया 1948 के ओलम्पिक।  जहा सब लोग इसे कमजोर समझ रहे थे।की एक हाथ से अपाहिज आदमी क्या कर लेगा । वह इस बंदे ने सब को शिकस्त देकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया इसके बाद सब सोच रहे थे कि ये बंदा रिटारमेण्ट ले लेगा  लेकिन कार्लोई ने 1952 ने ओलम्पिक में भी भाग लिया और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया  कारलॉयी से हमें ये सिख मिलती है कि ज़िन्दगी में हादसे कभी  बोल कर नहीं आते । ज़िन्दगी में चाहे जो भी



देवेन्द्पाल सिंह ( भारत)~~दोस्तो जब 1999 में कारगिल का युद्ध हुआ था। तब देवेन्द्र पाल सिंह हमारे देश के लिए लड़ रहे थे । ओर इसी में एक ग्रेनाइट हमले में वो बुरी तरह घायल हो गए थे।जिसके चलते उनकी जान बचाने के लिए डॉक्टर को उनका एक पैर काटना पड़ा था । इस हादसे में उन्हें कई चोंटे आई थी । कई बम के इसे टुकड़े है जो आज भी उनके शरीर में है ।सब कह रहे थे कि मेजर डि. पी. सिंह कभी चल नहीं पायेंगे । पर इस जिंद्दी बंदे ने कहा कि तुम सिर्फ चलने कि बात कह रहे हो में उठूंगा ओर  तुम्हे दौड़ कर दिखाऊंगा। ये उन्होंने कह तो दिया लेकिन उनको दौड़ने के लिए पूरे दस साल लगे । ओर 2009 में उन्होंने अपनी पहली रेस में हिस्सा लिया  और आज डि.पी. सिंह इंडिया के सक्सेस ब्लेड रनर है। ओर इनके नाम दो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड है।



 दोस्तो इस जमाने में अगर अपने सपने पूरे करने है तो आपको ज़िद्दी बनना पड़ेगा जब तक आपके सपने पूरे ना हो तब तक चैन से मत बैठो । उठो ओर तब तक प्रयास करना मत छोड़ो जब तक तुम्हारे सपने पूरे ना हो 

मुझे आशा है कि अपको ये कहानी अच्छी लगी होंगी में ऐसी ही मोटीवेशन से भरपूर स्टोरी लाता रहता हूं । तो आपको हमारे ब्लॉग ऐसी ही ढेर सारी स्टोरी मिलेगी उन्हें आप एक बार जरूर पड़े । 

Post a Comment