आपने लोगो को कई बार ये कहते हुए सुना होगा कि काश वो मौका मुझे एक बार फिर मिल जाता है तो में अपनी एक अलग पहचान बना लेता हूँ। लेकिन आपने एक बात नोटिस की कि इसमें उस व्यक्ति को पहले एक मौका मिला जिसका उसने सही से इस्तेमाल नहीं किया था जिसमें उसी की गलती है। अगर वह अपनी अलग पहचान बनानी ही थी तो वह उस मौके को ऐसे ही व्यर्थ नहीं जा रही है। चलो में आपको एक कहानी के माध्यम से इसको समझाता हूँ।
एक गांव की बात है कि गांव में एक गरीब व्यक्ति था। एक बार एक महात्मा उसके घर पर आए ओर कहा की तुम्हारे पास कुछ खाने को हो तो मुझे देदो। उस समय उस व्यक्ति ने महात्मा की अच्छी भोजन व्यवस्था की थी । जिससे वो महात्मा उस पर प्रसन्न हो गए। जब महात्मा के जाने का वक्त आया तो महात्मा ने इस व्यक्ति को एक पारस पत्थर दिया ओर कहा को आप इससे लोहे को सोना बना सकते हैं। लेकिन ये आपके पास सिर्फ सात दिन रहेंगा उसके बाद में इसको फिर से वापिस लेने आऊंगा।
यह बात को सुन कर वह बहुत खुश हुआ। दूसरे दिन वह उठ कर जल्दी से बाज़ार गया क्यों की उसको लोहा खरीदना था तो जब वह लोहे कि दुकान पर गया ओर उसने वहाँ लोहे का भाव पूछा तो उसको वह भाव बहुत ज्यादा लगा। फिर उसने सोचा कि अभी ज्यादा भाव है कल ले लूंगा शायद भाव कल तक काम हो जाए। ओर अपने घर चला गया। दूसरे दिन फिर से वे उस दुकान पर गए। ओर उसने पूछा तो आज भी वही भाव था। तो उसने उस दुकानदार से पूछा कि इसका भाव कब तक काम करेगा। तो उसने जवाब दिया कि 2 या 3 दिन में शायद कम हो जाएगा। यह सुनकर वह अपने घर चला गया।
फिर जब वो 3 दिन बाद उस दुकान पर गया तो उसने देखा कि पहले से आज का काम था। तो उसने कुछ लोहा खरीदने का सोचा लेकिन उसके मन में ये विचार आया कि उसको घर तक ले जाने में कुछ खर्चा हो जाएगा। तो क्यों ना में कल ही ले जाऊं शायद भाव ओर कम हो जाए। ओर घर चला गया
जब वह दूसरे दिन बाज़ार जाने के लिए जैसे ही घर से निकला तो वो महात्मा उसके सामने खड़े थे । महात्मा ने जब उसकी हालत देखी तो वो भी दंग रह गए । क्युकी उसकी हालत में कुछ भी सुधार नहीं आया था । इसका उस व्यक्ति को कारण पूछा तो उस व्यक्ति ने कहा कि अभी लोहा बहुत महंगा है । इसलिए में भाव काम होने का इंतजार कर रहा हूं । तो इस पर महात्मा ने कहा को अरे मूर्ख ! लोहा कितना भी महंगा क्यों ना हो सोने से तो कई गुना सस्ता ही होता है । अगर तुम लोहा खरीद देते तो आज वो सोने में बदल गया होता ओर तुम्हारे हालात भी ठीक हो जाते । आज तुम्हारे सात दिन पूरे हुए में तुमसे वो पारस पत्थर लेने आया हूं । ये बात सुनकर वो महात्मा के सामने गिड़गड़ाने लगा । उसने महात्मा से कहा कि मुझे सात दिन का ओर समय चाहिए । तो महात्मा ने कहा कि ऐसे मौके जीवन में बार बार नहीं मिलते तुमने इसकी महत्वपूर्णता को नहीं समझा गया। महात्मा ने इतना कहा ओर अपना पारस पत्थर लिया ओर वहा से चले गए।
। दोस्तो में आपको इस कहानी से ये समझाना चाहता है कि आपे जब भी कोई काम करने का मौका मिले तो आप उस मौके को हाथ से जाने मत दो जो उस मौके से आपकी जिंदगी ही बदल जाती है।
जो व्यक्ति इन अवसरों को पहचान लेते हैं उन्हें आसानी से सफलता मिल जाती है ओर जो नहीं जानते उन्हें सफलता पाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है।


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