सफलता अक्सर उन्हीं के कदम चूमती है जो सफलता की तलाश मेे मशगुल रहती है।
आज हम जिनकी बात कर रहे हैं आप सब उन्हें भली भांति जानते होंगे। उनका नाम मदन पालीवाल जो है कि मिराज ग्रुप ऑफ कंपनी के मालिक है।
केसे उन्होंने 200 रुपए से शुरू कर 2000 करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया।उन्होंने यह साबित कर दिया कि शुरुआत भले ही छोटे से करो पर शुरुआत होनी चाहिए। केवल योग तक पहुंचने का रास्ता मिलता है। कभी हमारी जिंदगी में कुछ ऐसा होता है। कुछ बड़े करने की चाह में छोटे अवसर गवा देते हैं। लेकिन हम ये तो ज़रूर जानते हैं।की आज जो भी अमीर और सक्सेस लोग है। उन्होंने शून्य से ही शुरुआत कर अच्छी सफलता प्राप्त की है।
मदन पालीवाल जब सातवीं कक्षा में थे तो उन्होंने अपना पहला व्यवसाय शुरू किया। लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से ये व्यवसाय ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया। लेकिन इस व्यवसाय से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला और बड़े होने के बाद एक व्यवसाय मेनू बनने का फैसला किया।
इसके बाद उन्होंने बहुत से क्षेत्रं में अपना हाथ आजमाया जैसे- प्लस्टिक बेग, नमकीन यह तक की अपने दोस्त के एक दोस्तभाजी के स्टॉल में अकाउंटेंट का काम भी किया लेकिन कोई भी व्यवसाय सफल नहीं हुआ पर फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी इन सब रुकावटों के साथ बावजूद उनकी हिम्मत कम नहीं हुई, लेकिन उनके लक्ष्य के प्रति निश्चय ओर भी मजबूत हो गया।
फिर उन्होंने तय किया कि वह किसी अन्य आइडिया पर काम करेगा। इसी दौरान उन्हें सरकार के शिक्षा विभाग में एक सरकारी नौकरी मिल गई। इस नौकरी की बदौलत उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी सुधरने लगी। लेकिन वे इस नौकरी से संतुष्ट नहीं थे, उनका सपना अभी तक पूरा होने वाला था। उनका सपना तो एक बिज़नस मेन बनने का था। ओर कुछ बड़ा करने का था। ओर बचे समय में व्यवसाय करने का विचार लेकिन कोनसा व्यवसाय करे ये समझ नहीं आ रहा था।
एक बार जब वे सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट में यात्रा कर रहे थे तब उनके पास बैठे एक व्यक्ति ने उन्हें तम्बाकू दिया तो उनके दिमाग में मिराज तम्बाकू का विचार आया। स्वच्छ ओर सुरक्षित विकल्प था। बिना पूंजी की आधारभूत संरचना के अनुसार उन्होंने 1987 में एक फर्म (मिराज ग्रुप ऑफ कंपनी) जो किया जो पूरी तरह सफल हुआ। धीरे धीरे उन्होंने अलग अलग छेत्रो में अपना हाथ आजमाया जैसे- FMCG क्वालजन, हॉस्पिटैलिटी, पाइप, कॉस्मेटिक और रियल एस्टेट।
इसके बाद 2008 में उन्होंने फिल्म उद्योग में भी अपनी किस्मत आजमाई।
इतने सारे व्यवसाय के बावजूद वे समाज की भलाई के बारे में सोचते रहे। ओर अपने आस पास गरीबों की सहायता करने के लिए आगे आए। उनके अलावा वे बॉलीबॉल खेलकूद के लिए भी संजीदा है। इसीलिए नाथद्वारा (राजस्थान) में एक स्टेडियम भी बन गया।
घर से शुरू हुआ एक प्रोडक्ट मिराज ग्रुप के बैनर तले आज बहुत सा इंडस्ट्रीज के रूप में बदल गया। वर्तमान में मिराज ग्रुप के अंदर अलग अलग 20 कंपनियों में शामिल है।
केवल 200 रुपए से शुरू होने के साथ यह कंपनी आज 2000 करोड़ के क्लब में शामिल हो गई हैं। इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि शुरुआत भले ही छोटे स्तर से करें लेकिन शुरुआत जरूर करें। तभी मंजिल पर पहुँचने का मार्ग मिलता है
इन कहानियों को भी जरूर पढ़ें

Post a Comment
Post a Comment