35500 करोड की संपत्ति दान करने वाले की महान इंसान की स्टोरी। एंड्र्यू कार्नेगी
आज हम जिनकी बात कर रहे है। वो ऐसी महान हस्ती है जिन्होंने अपनी सारी सम्पत्ति दान में कर दी। अपना सब कुछ दूसरों कि सहायता करने में लगा दिया
एक आदमी जो अपनी योग्यता और शक्ति का 25% ही काम में इस्तेमाल करता है। दुनिया उन लोगो का सम्मान करती है। जो अपनी योग्यता का 50% इस्तेमाल करते है ओर ये दुनिया गिने चुने लोगो को अपनी सर आखो पे बिठाती हैं जो अपनी योग्यता या 100% इस्तेमाल करते है।ये विचार उस महान इंसान के जिसने एक गरीब परिवार में जन्म लिया। जिसका बचपन अभावों के बिछ में बिता था। जो अपने जीवन में कठोर परिश्रम करके सफलता की बुलदियों पर पहुंचा था। जिसने अपनी सारी संपति मानवता के लिए परोपकारी में दान कर दी। बात हो रही है अमेरिका के विसिविख्यात ओर उस जमाने के सबसे अमीर आदमी की एंड्र्यू कार्नेगी की जिन्हें अमेरिका का स्टील किंग कहा जाता हे। उन्होंने अपने देश की उन्नति में एक महान योगदान दिया। ओर उसे दुनिया का सबसे समृद्धशाली देश बनाने में मदद की।
आधुनिक युग के इस महान दानवीर ने सन्न 1919 में अपनी कमाई का 90% यानी 350 डॉलर की संपति दान में दे दी थी। जिसकी आज वर्तमान कीमत 5 बिलियन रुपए है। इस सम्पत्ति को उन्होंने शिक्षा के प्रसार में लगाया। इसी बीच न जाने की स्कूल, कॉलेज , लाईबेरी, ओर अनुसंधान केंद्रों ने इस महान इंसान की महानुदरता का लाभ उठाया। शायद इसी वजह से अमेरिका टेक्नोलोजी ओर रिसर्च में दूसरे देशों से आगे निकल गया और दूसरे देश पिछड़े ही रह गए।आइए इस महान इंसान के बारे में शुरू से जानते है।
एंड्र्यू कार्नेगी का जन्म 25 नवम्बर 1835 । को स्कॉटलैंड के दुंफर्मलाइन में हुआ।इसके पिता विलियम कार्नेगी जुलाहे का काम करते थे।देश में भुखमरी कि वजह से वे बचपन में ही अपने माता पिता के साथ अमेरिका चले गए।जिसके लिए भी उनको पैसे उधार लेने पड़े। ओर वह जाकर उन्होंने अपनी पहली नौकरी 13 साल की उम्र में एक कपास फैक्ट्री में महिलाओं को धागे पकड़ाने का काम किया करते थे। ओर बचे समय में वो स्कॉटलैंड की इतिहास की पढ़ाई किया किया करते थे कार्नेगी एक मेहनती लड़का था। जिसे दुनिया में अपनी एक पहचान बनानी थी। कुछ समय बाद उन्हें एक टेलीग्राफ मैसेंजर की नौकरी मिली।
उस समय में जेम्स एंडरसन ने एक लाइब्रेरी खोली थी। इस लाइब्रेरी की खास बात यह थी कि यह काम कम करने वाले लड़कों के लिए शनिवार को खुलती थी। शनिवार के दिन वो ज्ञान हासिल करने और अपनी क्षमता बढाने में लगाते।
उनकी कड़ी मेहनत करने की लगन, धेर्य, ओर उनकी ग्रहण शीलता ने उनके लिए अवसरों के अनेकों दरवाजे खोल दिए।
ओर शीघ्र ही उन्हें पेंक्साईवेनिया रेलरोड कम्पनी में अच्छी सैलरी की नौकरी मिल गई। इस नौकरी का फायदा यह हुआ को कार्नेगी को इंडस्ट्रीयल ओर बिज़नेस का मॉडल समझ आने लगा था। ओर यही से चीजे बदलनी शुरू हुई।
कार्नेगी ने अपने साम्राज्य की शुरुआत रेलरोड बिज़नेस से ही की थी सन् 1860-65 में अमेरिका में गृहयुद्ध छिड़ने के कारण उन्हें बड़े पैमाने पर युद्ध का सामान तेयार करने का ऑर्डर मिला। ओर मुनाफा होने पर उन्होंने एक स्टील रॉलिंग मिल की स्थापना करके अपने स्टील साम्राज्य की नीव डाली
ओर स्टिल ओर ऑयल कम्पनियों में इनवेस्मेंट किए। धीरे धीरे बिज़नेस बड़ने लगे ओर हालात ये हो गए की 1890 के दशक में कार्नेगी स्टिल कॉर्पो.अपनी तरह की दुनिया कि सबसे बड़ी स्टील कम्पनी बन गई। इसके बाद कार्नेगी दुनिया के धनी व्यक्तियों में से एक हो गए। ओर अपने कारोबार को इस स्तर पर पहुंचा दिया कि। ब्रिटेन और स्पेन जैसे देश भी उनसे स्टील प्रोडक्शन में पिछड़ गए। कुछ समय बाद उन्होंने आयु बड़ने से बिज़नेस से रिटायरमेंट के लिया। ओर अपनी आधी से ज्यादा संपति दान में दे दी। इसका फायदा अमेरिका ने है नहीं बल्कि उनकी इस विश्वव्यापी उदरता का फायदा अनेकों देशों ने लिया और कार्नेगी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी नाम की यूनिवर्सिटी बनाई जिसे आज कार्नेगी मिलोने यूनिवर्सिटी से जानी जाती है।
लेकिन भारतीय अमीरों की मानसिकता ऐसी नहीं है जो अपनी शानो शौकत दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।लेकिन गरीबी ,भुखमरी, अशिक्षा,ओर दुर्दशा से दुख पाते लोगो के लिए एक रुपया तक दे पाने में समर्थ है।
महात्मा गांधी गरीबी को मानव षडीयंत्र मानते थे। ओर हम उनकी इस बात पर ध्यान दे की प्रत्येक देश में आर्थिक असामनता का कारण संपति का कुछ प्रभाव शाली लोगो के हाथो में सीमित रह जाना है। जो दूसरो के धन पर नाग की तरह कुंडली मर कर बैठे हुए है। ऐसे व्यक्तियों को निश्चित ही इस महान उदारवादी व्यक्ति से प्रेरणा लेनी चाहिए जिसके अपनी कमाई का आधे से ज्यादा भाग लोगो की सहायता करने में लगा दिया।
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