किसी के भरोसे मत रहो , किस्मत से बड़ी मेहनत होती है। बेस्ट मोटीवेशन स्टोरी इन हिंदी
नमस्ते दोस्तो
आपका हमारे इस ब्लोग पर स्वागत है। में आज आपको ऐसी कहानी बताने जा रहा हूं। जिसे पड़कर शायद आप किस्मत को कोसना बंद कर देंगे।
तो आइए शुरू करते है।
कुछ समय पहले कि बात है। एक गांव हुआ करता था । उस गाव में यूं तो सब धनी लोग थे परन्तु इसमें से एक घर ऐसा भी था जिसको अपनी खाने की पूर्ति के लिए घर-घर जाकर अनाज इकट्ठा करना पड़ता था उस घर में एक लड़का रहता था जिसका नाम रामू था जो कि बहुत मेहनती था। उसके पिता का देहांत जब वो 3 साल का था तभी हो गया था। किसी तरह उसकी मा जैसे-तेसे करके अपने घर का खर्चा निकलती थी। जैसे जैसे उसका बेटा बड़ा हुआ। अब उसकी पड़ाई के लिए पैसे कहा से लाए बस पूरे दिन यही सोच में डूबी रहती थी उसकी मा। मा की हालत देख कर उसने यह सोचा कि क्यों ना में ही कुछ छोटा मोटा कम करके अपने पड़ाई का खर्चा उठा की जिससे मा को कोई परेशानी नहीं होगी।
उसने जैसे तैसे करके अपनी पढ़ाई के लिए पैसे जमा करने लगा और किसी तरह उसने स्कूल में दाखिला ले लिया। वो रोज कुछ ना कुछ कम करके अपनी पढ़ाई का सारा इंतजाम कर लेता। धीरे धीरे उसने पड़ाई में अच्छे अंक प्राप्त करने लगा था।
वह लड़का मेहनती होने के साथ साथ पड़ाई में भी अच्छा था । जिससे अध्यापक उसकी प्रशंसा किया करते थे जिसके कारण उसकी कक्षा के दूसरे छात्र उससे घृणा करते थे
एक दिन कि बात है जब उन छात्रों ने मिलकर उसको फसाने के बारे में सोचा । और उसको किसी ऐसी गलती के लिए डाट लगवाना जो उसने की ही नहीं । सब लड़के स्कूल के प्रधााध्यापक के पास गए और उनको ये बताया को की रामू उनकी किताबे और पैसे चुरा कर अपनी स्कूल फिस भरता है जिसकी आप उसको उसको कोई कड़ी सजा दो। तो इस बात पर प्रधानाध्यापक जी ने कहा कि हम इसकी जांच करेंगे और दोषी होने पर उसको उचित दंड देंगे। बाद में गुरुजी द्वारा उसके बारे में जानकारी उपलब्ध करी । तब जाके उनको पता चला कि वो कोई चोर नहीं है बल्कि अपनी मेहनत से स्कूल की फीस जमा करवाता है।
अगले दिन प्रधानाध्यापक जी ने उसको सब के सामने बुलाया और उससे पूछा कि तुम काम करके अपनी स्कूल फीस जमा करते हो तो तुमने अपनी फीस माफ करने के लिए मुझे क्यों नहीं कहा। उसका जवाब सुन कर वहा पर बैठे सभी शिक्षक और बच्चो की आवाज क्षुब्द हो गई। गुरुजी ने ना उससे और कुछ पूछा और ना ही किसी से सवाल किया । आप सभी यही सोच रहे होंगे कि उस लड़के ने क्या जवाब दिया होगा तो आगे पढ़िए आपको सब पता चल जाएगा
जब गुरुजी ने उससे सवाल किया तो उसने जवाब दिया कि में खुद का खर्च खुद उठा सकता हूं तो में किसी और पर क्यों आश्रित रहूं। आप ही ने तो सिखाया था गुरुजी की खुद का काम खुद को करना चाहिए। तो में अपना काम स्वयं कर सकता हूं और स्कूल की फीस भी में खुद भर सकता हूं तो में किसी की सहायता लेकर क्या करूंगा। इस बात को सुनकर गुरुजी को उस लड़के पर नाज होने लगा।
दोस्तो इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि अपना काम स्वयं को करना चाहिए और यदि हो सके तो किसी और पर आश्रित नहीं होना चाहिए

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