डर के आगे जीत है तो डरो मत आगे बड़ों। बेस्ट मोटीवेशनल स्टोरी
नमस्ते दोस्तो आज फिर से आपका हमारे ब्लॉग पे स्वागत है। आज में आपको ऐसी स्टोरी
बताने जा रहा हूं । जिसको पड़कर आपके अन्दर एक जुनून सा पैदा हो जाएगा। चलिए आपको में उस कहानी के बारे में बताता हूं। जिसका शीर्षक है। ईमानदारी का फल।
बहुत पहले की बात है। दोस्तो एक गांव में एक राजा हुआ करता था।किस्मत से उस राजा को कोई सुख नहीं था। अर्थात उसके कोई संतान नहीं थी। उस राजा ने सोचा कि मेरी कोई संतान तो नहीं है। लेकिन मुझे किसी को तो अपना उततराधिकारी चुनना होगा। यहां की प्रजा की रक्षा करे और हमारे कुल को आगे बढ़ाएं। बहुत दिन तक सोचने के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया कि गांव में किसी लड़के को गोद ले लेंगे।जो यहां के लोगों की रक्षा कर सकेगा
कुछ दिनों बाद गाव में यह ऐलान कराया गया की महाराज अपना उततराधिकारी चुन रहे है जो कि गाव में ही किसी का लड़का होगा ।यह ऐलान सुनते ही लोगो के मन में खुशी छा गई ।और उसके अगले ही दिन सभी लड़कों को महल में उपस्थित होने को कहा गया।
सभी लड़के महल में आ गए।तभी महाराज ने उन सब लडको को एक एक बीज दिया। और कहा कि तुम्हे इस बीज को बड़ा करना है जिसके लिए तुम्हारे पास छः महीने का समय है।
महाराज को इस आज्ञा को मानकर सभी अपने अपने बीज कि बड़ा करने में लग गए। कुछ दिनो बाद सबके बीज से पोंधे बन गए सिर्फ एक को छोड़कर तीन महीने बीत जाने पर भी उस लड़के के गमले में पोंधा नहीं उगा जिससे वो बहुत उदास था। लेकिन वो लड़का ईमानदार था। उसकी उदासी को देखकर मा ने कहा कि कुछ बीज ऐसे होते है उनको बड़ा होने में कुछ वक्त लगता है। तुम बस इसकी अच्छे से देखभाल करो इसमें से पोंधा जरूर निकलेगा। वो लड़का उसकी अच्छी देखभाल करने लगा। छः महीने बीत जाने पर सबको अपने गमलों के साथ महल में बुलाया गया सब के गमलों में पोंधे थे। सीवाय उस लड़के को छोड़कर।लेकिन फिर भी वह महल में गया। वो अलग ही खड़ा था। क्यों की उसके गमले में पोंधा नहीं था।महाराज की नजर उस पर पड़ी और महाराज ने उसे सबके सामने बुलाया।उसको देख कर सब उसका मजाक बनाने लगे और हसने लगे । महाराज ने कहा शांत हो जाओ यही मेरा उतराधिकारी बनेगा यह देख कर सब एक दम से खामोश हो गए इस पर महाराज ने मंत्रियों ने कहा कि महाराज आपको इस लड़के में ऐसा क्या दिखा की अपने इसको अपना उततराधिकारी बना लिया तो इस पर महाराज ने कहा कि भले इसके गमले में पोंधा नहीं उगा लेकिन यह हिम्मतवाला है इसको पता था कि मुझे महाराज अपना उत्तराधिकारी नहीं चुनेंगे फिर भी यह हिम्मत करके यह पर आया है।इससे ज्यादा और भला किसी में क्या चाहिए। एक राजा बनने के और भला क्या जरूरत होनी चाहिए।
अब रही मुख्य बात इस कहानी से हमें क्या सीख मिली ।इस कहानी से साफ स्पश्ट समझ आता है कि कभी डरो मत क्युकी डर के आगे जीत है यदि वो लड़का डर कर या उसके बीज से पोंधा नहीं उगा इसके लिए वो महल नहीं जाता तो वह अपने साथ धोखा करता और एक बड़ा अवसर खो देता।तो कभी डरो मत आगे बड़ों जो होगा वो अच्छा होगा तुम बस अपनी मेहनत और लगन से काम को करते रहो ऊपर वाला सब देख रहा है उसने तुम्हारे बारे में कुछ तो सोचा ही होगा इसलिए मेहनत करने से मात गाबराओ ।
तो मुझे दीजिए इजाज़त में आपको ऐसी मोटीवेशन से भरी स्टोरी लाता रहूंगा ।
मुझे आशा है कि आपको ये स्टोरी अच्छी लगी होगी धन्यवाद
जय हिन्द जय भारत

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