नमस्ते दोस्तो
तो कैसे है आप मुझे उम्मीद है आप सभी अच्छे होंगे । आज में आपके लिए एक ओर मोटीवेशन से भरपूर स्टोरी लेके आया हूं । तो इस आप पूरा जरूर पड़ना । तो आइए शुरू करते है।
एक समय की बात है। दोस्तो ! जब एक मूर्तिकार जंगल के रास्ते कहीं पर जा रहा था । रास्ते में चलते चलते उसको एक सुंदर सा पत्थर दिखा उसने सोचा क्यों ना में इससे एक सुंदर सी मूर्ति बनाऊ । तो उसने अपने सारे ओजार अपनी थैली से बाहर निकाल ओर जैसे उसने उस पत्थर पर हथोड़े से उसको तराशना शुरू किया तो पत्थर बोला अरे भाई क्या कर रहे हो रहने दो मुझे दर्द हो रहा है। उसकी बात सुनकर मूर्तिकार अपना सामान थैली में भरकर आगे बढ़ जाता है ।
थोड़ी दूर चलने पर उसको एक ओर सुंदर पत्थर दिखता है। तो उसने सोचा कि इस पत्थर की भगवान की मूर्ति बनाई जाए । तो उसने अपने सारे ओजार बाहर निकाल ओर काम शुरू कर दिया । कुछ ही देर में उसने उस पत्थर की एक शानदार मूर्ति बना दी । मानो वो मूर्ति बोल पड़ेगी इसी मूर्ति बनाई थी उस मूर्ति कार ने उसने उस मूर्ति को वहीं पर छोड़ कर जाने का फैसला किया । उसने अपना सारा सामान समेटा ओर आगे की ओर चल दिया ।
वो चलते चलते एक गांव में का पहुंचा । उसने वहा पर देखा कि एक मंदिर का काम चल रहा था । ओर पूरा होने को आया था । वहा पर गांव वाले ओर उस गांव के मुखिया सब मिल कर इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि मंदिर तो पूरा बन चुका अब उसके अन्दर मूर्ति कहा से लाए । तो उस मूर्ति कार ने उनकी बात को सुनकर मुखिया जी को कहा कि अगर आप को कोई आपत्ती ना हो तो में कुछ कहूं । उसने बताया कि इस रास्ते पर मैने एक मूर्ति बनाई है अगर आप चाहे तो उस मूर्ति को इस मंदिर में स्थापित कर सकते है। उस मूर्तिकार की बात को मुखिया जी ने मान लिया ओर उस मूर्ति को लाकर मंदिर में स्थापित कर दिया ।
उस मूर्ति की अब पूजा ओर आरती होने लगी लोग रोज आकर उस मूर्ति के सामने अपना सर झुकाते । ओर उनकी आराधना करते । अब उस मंदिर में एक समस्या थी कि लोग जो भी मंदिर में आते है वो नारियल कहा पर फोड़े । उसके लिए उस मूर्तिकार ने उस पत्थर के बारे में बताया जो कि उस मूर्तिकार ने पहले देखा था । मुखिया जी ने उस पत्थर तो लाकर मंदिर के सामने रखवा दिया अब जो भी लोग आते वो उस पत्थर पर नारियल फोड़ देते थे ।
एक दिन वो दोनो पत्थर आपस में बात कर रहे थे। बाहर वाला पत्थर बोला की तुम्हारी किस्मत कितनी अच्छी है । की लोग तुम्हे पूजते है । तुम्हारे आगे अपना सर झुकाते है। तो इस पर उस मूर्ति वाले पत्थर ने कहा । की मेरी जगह पर तुम भी हो सकते थे । अगर तुम भी उस दिन उस मूर्तिकार की हथौड़ी की चोट को सहन कर लेते तो । मैने उस चोट को सहन किया ओर देखो अब ने कहा हूं ।
कहते है कि जो पत्थर छीनी ओर हथोड़े कि मार सहन नहीं कर पाता वो कभी मूरत नहीं बन सकता ओर। जो खेत हल चलाने से दुखी होता हो वो कभी अनाज नहीं पैदा कर सकता ।
दोस्तो मा ओर पापा की डाट छीनी हथोड़े जैसी भले लगती हो लेकिन इसी से हमें शिक्षा मिलती है। संस्कार मिलते है। प्रेरणा मिलती है। तो एक बात हमेशा याद रखना कभी अपने मा पिता कि बात का बुरा मत मानना क्यू की आज जो वो तुम्हे डाट रहे है ।तुम्हे हर बात सीखा रहे है वो तुम्हे ही आगे बढ़ने में मदद करेगा ।
तो किसी लगी स्टोरी हमें कमेंट में जरूर बताना ।।



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